मेरा प्रण

सुरुआत तूने की , अंत में करूँगा
बात को आग दी, हवा को दिशा दी
बात का बतंगड़ किया
सरेआम आग उगली
जो भी बोला , भला बोला निस्वार्थ है !
तेरा प्रेम उन यमदूतों के खून से
उनके पसीने में तुझे डर नजर आया,
मेरे खून के कतरे में तुझे फिर शक नजर आया
देश तेरा भी है मेरा भी ,में प्यार का पैगाम लाया
तूने जहर से फिर अमल लाया
रुक के भी न रुकी,नब्ज़ मेरी
काफिरों के हौसले फिर आज तू बुलंद कर  गयी ।
अशोक त्रिवेदी
18/08/2019

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